यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बना 10 वर्ष की उम्र में यह बालक , कंठस्त है श्रीमद्भागवत गीता के 700 श्लोक

यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बना 10 वर्ष की उम्र में यह बालक , कंठस्त है श्रीमद्भागवत गीता के 700 श्लोक

10 वर्ष की छोटी सी आयु में इस बालक ने विद्यार्थियों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया, भोजन में क्या खाना चाहिए और क्या ना खाए इस विषय पर महाविद्यालयों, विद्यालयों में जाकर व्याख्यान देना और जनजागरण का कार्य करना यही कार्य है 10 वर्ष की आयु के अभिज्ञ का.

अभिज्ञ मैसूर के सरकारी विद्यालय में कक्षा 6 का विद्यार्थी है. 7 वर्ष की उम्र में अभिज्ञ को गीता के सभी श्लोक कंठस्त है. अभिज्ञ को अपने इस अनूठे ज्ञान के लिए कई बार पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चूका है, अभिज्ञ भारत और जर्मनी के कई विद्यालयों में जा चूका है.

स्वच्छ शरीर प्रोग्राम के अंतर्गत अभिज्ञ का कहना है की शरीर को सिर्फ बाहर से साफ़ करने से कुछ नहीं होगा, शरीर को स्वस्थ्य रखने के शरीर के अन्दर भी साफ़ सफाई करनी होगी.

अभिज्ञ से जब सरकारी विद्यालय में पढने का कारण पूछा तो उनका कहना था की ऐसे विद्यालयों में विनम्रता का पाठ पढाया जाता है किन्तु प्राइवेट विद्यालय के बच्चों में अभिमान आ जाता है.

इसके अलावा अभिज्ञ विद्यालय में संस्कृत, ज्योतिषी और आयुर्वेद के कोर्स भी पढ़ रहा है साथ आयुर्वेदिक सूक्ष्म विज्ञान से डिप्लोमा कर रहा है.

विष्णुसहत्रनाम पूर्वभाग- अभिज्ञ

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