उत्तराखंड में भाजपा ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, कांग्रेस के 11 विधायक हुए बागी

उत्तराखंड में भाजपा ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, कांग्रेस के 11 विधायक हुए बागी

 देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में मचे घमासान के बीच कांग्रेस के मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार बुरी तरह से खतरे में आ गई है। बीजेपी के विधायकों ने शुक्रवार देर शाम को राज्यपाल से मुलाकात करके  सरकार बनाने का दावा प्रस्तुत कर दिया है। देर रात करीब 11.15 बजे कांग्रेस के 11 बागी विधायकों और बीजेपी के विधायकों ने  राजभवन पहुँच कर राज्यपाल से मुलाकात की।

इससे पहले सीएम हरीश रावत की कैबिनेट के मंत्री हरक सिंह रावत ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। इस बीच केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता महेश शर्मा भी देहरादून पहुंच गए। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा को उत्तराखंड के राजनीतिक मामले को देखने का जिम्मा सौंपा है। बताया जाता है कि कांग्रेस के बागी विधायकों में हरक सिंह रावत के अतिरिक्त, विजय बहुगुणा, अमृता रावत, शैली रानी रावत, कुंवर प्रणव चैम्पियन, उमेश शर्मा काऊ, शैलेन्द्र मोहन सिंह सिंघल, सुबोध उनियाल और प्रदीप बत्रा के नाम शामिल हैं।  70 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 36 विधायक हैं जिनमें से 11 के बगावत की बात कही जा रही है, जबकि बसपा के भी एक विधायक ने विरोध दर्ज कराया है। कुल मिलाकर उत्तराखंड में हरीश रावत की सरकार फिर से खतरे में हैं। हालाँकि हरीश रावत ने देर रात कहा कि अभी तक सिर्फ एक चेहरा ही सामने आया है। हमारे पास पूरा बहुमत है।

उत्तराखंड सरकार को बर्खास्त करें राज्यपाल

रात बीजेपी सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने बयान जारी करते हुए कहा है कि राज्यपाल तुरंत सरकार को बर्खास्त करें। सरकार अल्पमत में है। उसे सत्ता में बने रहने का कोई हक़ नहीं है। इससे पहले शुक्रवार शाम को फाइनेंस बिल पेश होने के दौरान विधानसभा में हंगामे और उसके बाद दो मंत्रियों के बीच बहस के बाद कांग्रेस विधायकों के दो गुट ही नहीं बने बल्कि इन दोनों गुटों में खूब धक्का-मुक्की भी हुई।

देहरादून में दिनभर के सियासी ड्रामे के बाद देर शाम विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ। कांग्रेस के 11 विधायक सरकार के खिलाफ खड़े दिखे। सदन और बाहर नेताओं ने जमकर हंगामा किया। बीजेपी ने वित्त विधेयक पर मत विभाजन की मांग की, जिसे विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने नकार दिया। इसके बाद बीजेपी नेताओं ने जमकर हंगामा काटा और कांग्रेस के कई विधायक भी इस मामले में सरकार के खिलाफ खड़े हो गए। हंगामे के बीच उत्तराखंड विधानसभा को 28 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। इन दिनों उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र चल रहा था।

हरक के नेतृत्व में बगावत

जिन विधायकों को हरीश रावत सरकार के खिलाफ माना जा रहा है उनमें हरक सिंह रावत, बिजय बहुगुणा, सुबोध उनीयाल, अमृता रावत, शैला रानी रावत, प्रदीप बत्रा, कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, शैलेंद्र मोहन सिंघल, उमेश शर्मा काव और दो अन्य विधायकों के नाम सामने आ रहे हैं। हालाँकि शुक्रवार दोपहर में उत्तराखंड सरकार पर मंडरा रहा संकट खत्म होने का दावा किया गया था। बताया जा रहा था कि बागी गुट (हरक सिंह रावत) के 13 विधायकों को हरीश रावत ने मना लिया है। यही नहीं हरक सिंह को मनपसंद सीट से चुनाव लड़ने की पेशकश कर दी गई है। इसके अलावा पूर्व सीएम विजय बहुगुणा को राज्यसभा भेजने का रास्ता भी साफ हो गया है।

सुबह से ही बना हुआ संकट

उत्तराखंड सुबह से ही सियासी संकट गरमाया हुआ था। कांग्रेस के 12 विधायक पार्टी छोड़ने का मन बना चुके थे। वहीं खबरें ये भी थीं कि ये सभी 12 विधायक बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय की उपस्थिति में भाजपा के साथ जुड़ सकते थे। 70 सीटों वाली उत्तराखंड विधानसभा में कांग्रेस के पास 36 विधायक हैं। वहीं बीजेपी के पास 28, निर्दलीय 3, बीएसपी के 2 और यूकेडी के पास 1 विधायक है। पूर्व मुख्यमंत्री और अभी विधायक विजय बहुगुणा के बारे में कहा जाता है कि वह जुलाई में खाली हो रही राज्यसभा की सीट चाहते हैं। इसी को लेकर उत्तराखंड में सुबह से यह सारा रायता फैलाया गया था। इसको लेकर बीजेपी नेता तीरथ रावत ने कहा था कि कांग्रेस विधायकों में नाराजगी है। 12-13 विधायक हमारे संपर्क में हैं। उन्होंने आगे कहा कि जहां तक सरकार गिराने की बात है, ये समय पहले भी 2-3 बार आया है, अगर बीजेपी चाहती तो तब सरकार गिराती।

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