इस वजह से मोदी ने चीन की जगह जापान को दे दिया बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट

नई दिल्ली। चीन को अपनी आर्थिक तरक्की पर फख्र है, अपनी विशाल सैन्य ताकत का दम वो पूरी दुनिया को दिखाता रहता है। आर्थिक और सैन्य दोनों ही मोर्चे पर भारत चीन के मुकाबले पीछे है। लेकिन पीएम मोदी की कूटनीति से एक नई तस्वीर तैयार हो रही है। यकीन करना मुश्किल है कि बुलेट ट्रेन का सपना देश ने करीब 30 बरस पहले देखा था। तब से लगभग हर रेल बजट में हर चुनाव में बुलेट ट्रेन की बात हुई, लेकिन सत्ता में आने के बाद से पीएम मोदी की जबरदस्त कोशिशों की बदौलत पहली बार सपना-समझौते में बदला है। चीन भी भारत में बुलेट ट्रेन शुरू करने को लेकर जोश में था। लेकिन जापान की बेहद रियायिती शर्तों ने प्रोजेक्ट उसे दिला दिया। बुलेट ट्रेन की तरह ही देश के लिए एक बड़ा फायदेमंद मामला परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल को लेकर दोनों देशों के बीच बनी समझदारी भी है।

तेज रफ्तार तरक्की के लिए परमाणु सयंत्र से ज्यादा बिजली उत्पादन हमारी जरूरत है, लेकिन अमेरिका से एटमी करार के कई साल बाद भी परमाणु सयंत्र के लिए यूरेनियम खरीदने में मुश्किल हो रही है। अब जापान का साथ मिलने के बाद हालात बदल सकते हैं। परमाणु बिजली घरों से लेकर बुलेट ट्रेन तक तरक्की के ये पहिए भारत को मजबूत बनाएंगे। मजबूत भारत चीन के लिए चुनौती है, जिसे वो बड़े बाजार से ज्यादा अहमियत नहीं देना चाहता।

इसलिए इशारों में धमकाने से भी बाज नहीं आ रहा। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, चीन की तरक्की से भारत आर्थिक फायदा लेना चाहता है, इसलिए वो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को नाराज नहीं करना चाहता। ये जानते हुए कि चीन-जापान के रिश्ते बहुत अच्छे नहीं हैं, भारत टोक्यो से रिश्ते मजबूत करने के प्रति सतर्क है, ताकि बीजिंग से रिश्ते निभाने में सहूलियत रहे। भारत सरकार चीन-जापान में से किसी का पक्ष नहीं लेना चाहती, वो जानती है कि बीजिंग के खिलाफ खड़े होना फायदेमंद नहीं है।

तस्वीर का दूसरा पहलू ये है कि प चीन भारत से रिश्ते निभाने में सतर्क नहीं है। पाकिस्तान से लेकर दक्षिण चीन सागर तक वो भारत को अपनी ताकत की धौंस देने से बाज नहीं आता। चीन की धौंसबाजी का ही नतीजा है कि भारत ने हाल ही में चीन के सख्त ऐतराज को नजरअंदाज कर जापान को मालाबार नौसैनिक अभ्यास में बुलाया, जो हर साल अमेरिका के साथ होता है। चीन को लगता है कि अमेरिका और जापान के साथ मिल कर भारत उसके खिलाफ जवाबी चक्रव्यूह तैयार कर रहा है, लेकिन शिंजो आबे की भारत यात्रा के दौरान अब ये समझौता भी हो गया है कि अब से जापान मालाबार अभ्यास का स्थाई साझीदार बन जाएगा। यही नहीं पहली बार जापान किसी देश को यूएस-2 एंफीबियंस प्लेन की तकनीक देने की सोच रहा है, जो समंदर में भी उतर सकता है।

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