मोदी की कूटनीति से खुद अपने ही जाल में फंस गया चीन!

नई दिल्ली। भारत-जापान की बढ़ती दोस्ती से चीन चिंता में पड़ गया है। दरअसल, उसकी चिंता स्वाभाविक भी है। लंबे वक्त से चीन भारत के पड़ोसी मुल्कों में पैर जमा कर भारत को घेरने की कोशिश कर रहा था,लेकिन अब उसकी ही चाल खुद उसी के खिलाफ इस्तेमाल हो रही है। पीएम मोदी की कूटनीति की बुलेट ट्रेन वाली रफ्तार से चीन परेशान है।

जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पीएम शिंजो आबे दोनों मुल्कों की दोस्ती की नई इबारत लिख रहे थे, उसी दिन चीन ने भारत के पड़ोसी बांग्लादेश को दो आत्याधुनिक जंगीजहाज सौंपा है। हाल ही में चीन ने हिंसाग्रस्त नेपाल को सस्ती कीमत पर पेट्रोल देने का समझौता भी किया, अब तक नेपाल सिर्फ भारत से तेल लेता रहा है। ये दो उदाहरण ही काफी हैं कि चीन-भारत को घेरने का कोई भी मौका नहीं चूकता है।

कुछ वक्त पहले चीन ने पाकिस्तान के साथ चाइना-पाकिस्तान इकॉनॉमिक कॉरिडोर समझौता किया है। इस कॉरिडोर से पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से पाक अधिकृत कश्मीर से होते हुए चीन के ताशकुरगन हवाई अड्डे तक का रास्ता खुल जाएगा। ये कॉरिडोर भारत की सुरक्षा के लिए खतरा है, जहां से आतंक की लगातार घुसपैठ होती है। चीन पाकिस्तानी फौज को भी मजबूत कर रहा है। उसकी इन्हीं हरकतों की वजह से भारत जवाब देने के लिए मजबूर हुआ है। जहां, भारतीय सेनाएं चीन के खतरे के मद्देनजर खुद को आधुनिक बना रही हैं, वहीं प्रधानमंत्री मोदी जवाबी कूटनीतिक चक्रव्यूह तैयार कर रहे हैं।

जापान के साथ पुख्ता दोस्ती के साथ-साथ मार्च 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन द्वीप देशों का दौरा किया, ये देश थे मॉरिशस, सेशेल्स और श्रीलंका। श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह को विकसित करने में चीन भारी मदद कर रहा था, लेकिन प्रधानमंत्री ने अपने दौरे श्रीलंका के साथ नए संबंधों की शुरुआत कर चीन की बढ़त रोकने की कोशिश की।

हिंदमहासागर के तीन द्वीप देशों की पीएम की यात्रा के दौरान भारत ने सेशेल्स में रडार प्रोजेक्ट लगाने का भी समझौता किया। सेशेल्स ने भारत को समुद्र में निगरानी के लिए एक टापू भी तोहफे में देने का भी ऐलान किया। मॉरिशस अपने देश में भारत की निगरानी चौकी को ज्यादा सहूलियत देने के लिए तैयार है। भारत अमेरिकी और वियतनामी नौसेना के साथ भी सहयोग कर रहा है ताकि दक्षिण चीन सागर में कोई एक मुल्क हावी ना हो पाए। जापान भी इस कोशिश में बाकी मुल्कों के साथ है।

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