चीन के सैन्य विस्तार को ले कर भारत को चिंता की आवश्यकता नहीं : चीन

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चीन ने आज कहा कि भारत को मालदीव के नए नियमों के तहत वहां चीन के सैन्य विस्तार को लेकर चिंतित होने की जरूरत नहीं है क्योंकि चीन की विदेशों में नौसेना अड्डे बनाने की नीति नहीं है लेकिन उसकी कंपनियां व्यवसायिक इस्तेमाल के लिए भूमि पर नियंत्रण कर सकती है।

सरकार संचालित चाइना डेली अखबार ने आज अधिकारियों के हवाले से यह खबर दी है । मालदीव के नए कानून के तहत विदेशियों को उसकी जमीन का मालिकाना हक हासिल करने की मंजूरी दी गयी है।

मालदीव ने एक विधेयक को मंजूरी देकर विदेशियों को एक निर्दिष्ट स्थल के भीतर भूमि का मालिकाना हक हासिल करने के लिए एक अरब डॉलर से अधिक के निवेश की अनुमति दे दी।

अखबार ने कहा कि मालदीव सरकार के हिन्द महासागर को विसैन्यीकृत क्षेत्र बनाए रखने के भरोसे को देखते हुए भारत को चीन के सैन्य विस्तार को लेकर चिंतित नहीं होना चाहिए।

चीन ने इससे पहले 1.5 अरब डॉलर की लागत वाली कालंबो बंदरगाह शहर परियोजना के लिए भी ऐसा ही कहा था। कोलंबो बंदरगाह पर पिछले साल एक चीनी पनडुब्बी के आकर खड़े होने का भारत ने कड़ा विरोध किया था।

अखबार ने देश की रक्षा नीति पर एक श्वेत पत्र जारी करने वाले एक सैन्य अधिकारी के हवाले से कहा कि चीन के विदेशों में कोई भी सैन्य अड्डे नहीं हैं। श्वेत पत्र में साथ ही चीन के समुद्र तटों से दूर खुले सागर में चीनी नौसेना के लिए बड़ी भूमिका की बात की गयी है।

श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरीसेना ने परियोजना पर रोक लगा दी है और अब तक उसे हरी झंडी नहीं दी है।

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