आरक्षण की आग में जला गुजरात , हार्दिक पटेल रिहा

पटेलों को ओबीसी में शामिल करने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू करने वाले हार्दिक पटेल को अहमदाबाद पुलिस ने हिरासत में ले लिया जिसके बाद उनके समर्थकों ने जमकर तोड़फोड़ की। बाद में हार्दिक पटेल को रिहा कर दिया गया।

पुलिस ने बिना अनुमति के धरना देने के आरोप में हार्दिक को हिरासत में लिया था। इनके समर्थकों पर पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया। इससे पहले हार्दिक पटेल के समर्थकों ने पुलिस पर पथराव किया था। अहमदाबाद पुलिस ने समर्थकों पर जीएमडीसी मैदान में लाठीचार्ज किया है।

पटेल की हिरासत से भड़के लोगों ने गुजरात के गृह मंत्री रजनीकांत पटेल के आवास पर प्रतिक्रिया में प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की। पत्थरबाजी में मंत्री के घर के शीशे टूट गए। प्रदर्शनकारियों ने बसों पर भी पथराव किया।

पाटीदार आंदोलन से गुजरात सरकार और राज्य की बीजेपी संकट में फंस गई है। बीजेपी सरकार ने अब पटेलों के आंदोलन से निपटने के लिए पटेलों को ही आगे कर दिया है। बीजेपी इस रणनीति से होने भविष्य में होने वाले राजनीतिक नुकसान को कम करना चाहती है। गुजरात की आबादी में पाटीदार 20 पर्सेंट हैं लेकिन प्रदेश की सरकार में सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व इसी समुदाय का है।राज्य सरकार को आशंका है कि कहीं यह आंदोलन के उसके ऊपर हावी न हो जाए। दूसरी तरफ यह भी साफ है कि पटीदारों का यह आंदोलन पटेल बनाम पटेल होने जा रहा है। गुजरात में इस आंदोलन के असर की परीक्षा भी जल्द ही होने जा रही है। इसी साल अक्टूबर में 6 म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन, 253 नगरपालिका, 208 ताल्लुका पंचायत और 26 डिस्ट्रिक्ट पंचायत के चुनाव होने वाले हैं। बीजेपी के 20 विधायक पटेल हैं। इनमें से आठ पटेल विधायक मंत्री हैं। इनमें चार कैबिनेट मंत्री और एक मुख्यमंत्री हैं। इस सरकार के ब्यूरोक्रेट्स में 16 आईएएस ऑफिसर, 10 आईपीएस ऑफिसर और 34 डेप्युटी सूपेरिंटेंडेंट पटेल हैं।

राज्य के कुल 182 विधायकों में से 41 विधायक (कांग्रेस और बीजेपी दोनों के) पटेल हैं। सचिवालय के कुल स्टाफ में (क्लास 2 और 3 मिलाकर) 100 लोग पटेल हैं। हालांकि इस सरकार में पटेलों की भागीदारी और ज्यादा ही होगी। इन पटेलों में सबसे प्रभावी आनंदीबेन पटेल के अलावा स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल हैं, जो कि उस सात सदस्यीय समिति के हेड हैं जिसे आंदोलनकारियों से बातचीत की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही वित्त मंत्री सौरभ पटेल और गृह राज्य मंत्री रजनीकांत पटेल हैं। रजनीकांत पटेल इस आंदोलन के कारण प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती से जूझ रहे हैं।

इसके बाद पर्यटन एवं जल सप्लाई मंत्री जयेश रदाडिया और इनके सांसद पिता विट्ठल रदाडिया अहम पटेल नेता हैं। गुजरात सरकार पाटीदारों के आंदोलन को चुनौती देने के लिए इन सभी पटेलों को आगे करने जा रही है ताकि आंदोलन को कमजोर किया जा सके। सूत्रों का कहना है कि ग्रामीण विकास मंत्री जयंती कावडिया जो कि सुरेंद्रनगर में प्रभावी पटेल नेता हैं, उन्हें बीजेपी इस आंदोलन के खिलाफ उतारने जा रही है।

सूरत में कठिन होगी चुनौती
सूरत में ओबीसी कोटा की मांग को लेकर पटेलों का प्रदर्शन सबसे ज्यादा उग्र रहा है, इस लिहाज से सूरत से ताल्लुक रखने वाले खेल, युवा तथा संस्कृति मामले के राज्य मंत्री नानूभाई वनानी और पूर्व मंत्री नरोत्तम पटेल के लिए वहां प्रदर्शनकारियों का सामना करना कठिन चुनौती होगी। सूरत में पटेल समुदाय का मजबूत आधार और शहर के हीरा बाजार पर इनका नियंत्रण है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के राजनीतिक करियर को चमकाने में इनकी भूमिका भी अहम रही है।

एकजुट काम कर रही है कैबिनेट
वित्त मंत्री सौरभ पटेल ने कहा, ‘यह सिर्फ पटेल मंत्रियों की बात नहीं है। सभी मंत्रियों की कोशिश है कि इस मुद्दे का शांति एवं सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान हो।’ यह राज्य पटेल समुदाय के सत्ता का गलियारा रहा है, जहां 1973 में इसी समुदाय के मुख्यमंत्री रहे हैं, जबकि राज्य के 5 मुख्यमंत्रियों का संबंध इसी समुदाय से रहा है। देश के शीर्ष व्यवसायी भी इसी समुदाय से आते हैं। राजनीतिक पार्टियों की बात करें तो वोट बैंक के लिहाज से उन पर इस समुदाय का खासा प्रभाव रहा है। वहीं राज्य के रियल स्टेट पर भी इस समुदाय का नियंत्रण है।

सांसदों, विधायकों, नेताओं ने मिलाए हाथ
पार्टी स्तर पर बात करें तो प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष आर. सी. फालदू, संगठन महासचिव भिखुभाई दालसानिया, उपाध्यक्ष कौशिक पटेल, उत्तरी जोन के प्रभारी महासचिव के.पी. पटेल और सौराष्ट्र के प्रभारी महासचिव और सांसद मनसुख पटेल सभी पटेल समुदाय से हैं। इनकी कोशिश होगी प्रदर्शन से सरकार का कोई नुकसान न हो। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जिला स्तर पर 35 पटेल नेता जिला अध्यक्ष या फिर महासचिव पद पर तैनात हैं।

आंदोलन के असर को कम करने के लिए सांसद और केंद्रीय मंत्री मोहनदास कुनदरिया राजकोट पर नजर रखेंगे। वहीं, सांसद दिलीप पटेल और विट्ठल रादाडिया आनंद और सौराष्ट्र में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि वहां प्रदर्शन नियंत्रण से बाहर न हो जाए। इस बीच, बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम रुपाला पटेल आंदोलन की आंच बीजेपी पर न पड़ने देने की दिशा में काम कर रहे हैं। नेताओं के अतिरिक्त वरिष्ठ ऑफिसर भी पटेल आंदोलन को नियंत्रित करने के लिए ओवर टाइम कर रहे हैं। आईपीएस ऑफिसर आईजी हशमुख पटेल राज्य और शहरों के हालात पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं, अडिशनल पुलिस कमिशनर (ट्रैफिक) हरिकृष्ण पटेल के लिए प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे लाखों लोगों को नियंत्रित करना कठिन चुनौती बन गई है, जो राज्य में यातायात को निर्बाध गति से चलने देने के लिए ओवर टाइम कर रहे हैं।