#IS के इलाके में सिखों के इस कदम से पूरी दुनिया दंग, ओबामा ने किया सलाम

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IS के इलाके में सिखों के इस कदम से पूरी दुनिया दंग, ओबामा ने किया सलाम

#IS के इलाके में सिखों के इस कदम से पूरी दुनिया दंग : सीरिया में जो हो रहा है, वो किसी से छिपा नहीं है। वहां IS के खिलाफ जंग में दुनिया के तीन बड़े देश शामिल हैं। रशिया, ब्रिटेन और अमेरिका लगातार IS के ठिकानो पर धावा बोलकर उनके ठिकाने नष्ट कर रहे हैं। दोनों तरफ की लड़ाई में लोग मर रहे हैं। वहां बच्चों और महिलाओं की हालत बदतर है। दुनिया के उस हिस्से में मचे कोहराम ने मानवता को हिलाकर रख दिया। लेकिन इस सबके बीच जान बचाकर भाग रहे यजीदियों के लिए शरणार्थी शिविर लगाए गए हैं।

#IS के इलाके में सिखों के इस कदम से पूरी दुनिया दंग, ओबामा ने किया सलाम
#IS के इलाके में सिखों के इस कदम से पूरी दुनिया दंग, ओबामा ने किया सलाम

इसी कड़ी में सिखों के एक बड़े समूह (खासला एड) ने भयंकर तनावग्रस्त युद्ध क्षेत्र में मोर्चा संभाल लिया है। जहां शरणार्थियों को शेल्टर के साथ खाना (लंगर), कपड़ा और दवाइयां मुहैया कराई जा रही है। तनाव ग्रस्त और अंदरूनी इलाकों में सिख युवा मानों जान हथेली पर रखकर मदद जुटा रहे हैं। हालांकि इस काम में दिक्कते पेश आ रही हैं, लेकिन वो दिक्कते वहां कि जिन्दगियों के सामने कुछ नहीं है।

शरणार्थी कैंपों में संभाला मोर्चा : ग्राउंड जीरो की तस्वीरों में खालसा एड के वॉलेंटियर्स भोजन के अलावा राशन बांटते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा परिवारों तक पहुंच बनाई है। यही कारण है कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि सिखों द्वारा किए गए मानवीय कार्य काफी सराहनीय हैं।

“नेशनल प्रेयर ब्रेकफास्ट” के वार्षिक कार्यक्रम को संबोधित करते उन्होंने कहा कि जब हेती में धरती हिली तो सिख, इसाई समूहों ने बेघरों के घर बनाने के लिए वॉलेंटियर्स भेजे। इसके अलावा प्राकृतिक आपताओं के दौरान सिख समूह ने काफी उल्लेखनीय कार्य किए हैं। खास बात है कि सीरियाई शरणार्थियों ने अमेरिकी तटों पर आकर सुरक्षित स्थानों के लिए गुहार लगाई थी, तब यहूदियों के उपासना गृहों से लेकर गुरुद्वारों और चर्चों, मंदिर- मस्जिदों में उनका स्वागत किया गया।

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#IS के इलाके में सिखों के इस कदम से पूरी दुनिया दंग, ओबामा ने किया सलाम

सीरिया में कब से बिगड़े हालात? : 15 मार्च 2011 को सीरिया में जनता ने प्रदर्शन शुरू किया था, जो उत्तर पूर्व में जरी अरब क्रांति का हिस्सा था। विरोधियों की मांग थी कि राष्ट्रपति बशर अल अस्सद पद त्याग दें। सैनिकों ने देशभर के प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चला दीं। इसके बाद आंदोलन शस्त्रबद्ध हो गया। इसके बाद वहां IS लड़ाकों ने काफी बड़े हिस्से में कब्जा कर हमले शुरू कर दिए।

दया धर्म का मूल है : शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधकर कमेटी के पूर्व सदस्य और अकाल पुरख की फौज के अध्यक्ष जसविन्दर सिंह एडवोकेट ने सीरिया में सिख समूह की मदद को लेकर कहा कि धर्म का मूल सेवा है। उन्होंने इतिहास की एक बड़ी घटना का जिक्र करते बताया कि, साल 1704 में जब आनंदपुर साहिब में सिखों और मुगलों के बीच युद्ध हुआ, तो भाई घनैय्या जी नामक सिख सैनिक ने मुगल सेना के घायल जवानों को पानी पिलाना शुरू कर दिया, जिसकी शिकायत दसवें गुरु, गुरु गोबिन्द सिंह जी महाराज से की गई थी, तो गुरु साहिब ने भाई घनैय्या जी को शाबाशी देकर उन्हें प्रोत्साहित किया था, साथ ही कहा था कि “दया ही धर्म का मूल” है। जसविन्दर सिंह ने कहा कि आज सिख दुनियाभर में फैले हैं, जो विदेशों में अपनी धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सामाजिक विकास की मूल भावना में बड़े भागीदार रहे हैं।

जम्मू-काश्मीर बाढ़ पीड़ितों की मदद : खालसा एड के युवाओं ने साल 2014 में जम्मूकाश्मीर का रुख किया था। जब बाढ़ से हाहाकार मचा थ, तब युनाइटेड सिख संस्था और शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सहयोग से राहत और बचाव कार्य में हिस्सा लिया, उस वक्त हरमंदर साहिब अमृतसर से“लंगर” हवाई मार्ग से प्रभावित इलाकों तक पहुंचाया गया।

जम्मू, श्रीनगर, पुलवामा, सहित अनंतनाग जैसे इलाकों में वॉलेंटियर्स जान की परवाह किए बगैर सेवा में जुटे रहे। आपको बता दें,  सितम्बर 2014 में अर्ध शताब्दी की सबसे भयानक बाढ़ आई थी, जो केवल जम्मू और कश्मीर तक ही सीमित नहीं थी। पाकिस्तान नियंत्रण वाले इलाकों में भी इसका खासा असर दिखा था। 8 सितम्बर 2014 तक,  भारत में लगभग 200, और पाकिस्तान में 190 लोगों जाने गई थी

#IS के इलाके में सिखों के इस कदम से पूरी दुनिया दंग, ओबामा ने किया सलाम
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नेपाल त्रासदी में मदद के हाथ : 25 अप्रैल साल 2015 को नेपाल भूकम्प से थर्रा गया था, जिसकी तीव्रता 8.1 मापी गई थी। उस दौरान कई प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर और इमारतें जमीदोज हो गई। 8000 से अधिक मौते हुईं, तो 2000 से अधिक घायल हुए थे। ऐसे में भारत सहित दुनियाभर से मदद के हाथ आगे आए। ब्रिटेन की खालसा एड संस्था के युवा फिर मैदान में उतरे, उन्होंने काठमांडू सहित अन्य शहरों में जाकर राहत और बचाव कार्य में योगदान दिया। हजारों की संख्या में खाने की सामग्री के पैकेट लोगों तक पहुंचाए गए थे, जिसमें पीने का साफ पानी, दवाएं, बच्चों के लिए दूध सहित कपड़े पीड़ितों को मुहैया करवाए गए।

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चलते-चलते : संयुक्त राष्ट्र और सहायता एजेंसियों का कहना है कि गृहयुद्ध ने देश में नर्क जैसे हालात बना दिए। आंकड़ों के मुताबिक सीरिया में ढाई लाख से ज्यादा लोगों की मौतें हो चुकी है।

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अंत में एक तस्वीर की तरफ ध्यान खींचना चाहूंगा, जो सोशल साइट्स पर वायरल हुई, तो सैंकड़ों आंखे नम हो गई। तस्वीर में आलयान नामक बच्चे की लाश समुद्र किनारे औंधे मुह पड़ी थी,  जिसने शरणार्थियों की तकलीफों को दुनिया के सामने रखा। नाव पलटने के दौरान आलयान, उसके भाई और मां की मौत हो गई थी,  जबकि पिता की जिन्दगी विरान हो चुकी है। पूरा परिवार कनाडा में शरण लेने के लिए जद्दोजहद कर रहा था। मध्य अरब के देशों में गृहयुद्ध के चलते जो हालात बने, वो काफी दुखद हैं। वहां पीड़ितों को प्यार और सहारे की जरूरत है।

IS के इलाके में सिखों के इस कदम से पूरी दुनिया दंग, ओबामा ने किया सलाम

(सभी फोटो सोशल मीडिया और खासकर फेसबुक से साभार हैं। )

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