जानें क्‍या है Gold Monetisation Scheme और कैसे उठाएं इसका लाभ

प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वर्ण मौद्रीकरण स्कीम (जीएमएस) लॉन्च की, जिसके तहत आप अपने घरों में रखे सोने या फिर ज्वैलरी को बैंकों में जमा कर सकते हैं और 2.75 फीसदी तक ब्याज भी कमा सकते हैं।

जानें इस योजना के तहत आपको कैसे और क्या करना होगा:

अगर आप इस स्कीम के तहत सोना जमा करना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको अपने नजदीकी बैंक के पास जाना होगा और ये पता करना होगा कि उस बैंक से मान्यता प्राप्त प्योरिटी सेंटर कौन सा है। इस स्कीम के तहत नागरिक के पास कम से कम 30 ग्राम सोना होना चाहिए, जिसे वह बैंक की ओर बताए गए प्योरिटी सेंटर में जमा करा सकता है।

प्योरिटी सेंटर पर आपकी ज्वैलरी की प्योरिटी चेक की जाएगी और फिर बताया जाएगा कि 99.95 फीसदी प्योरिटी के हिसाब से आपकी ज्वैलरी कितने ग्राम की मानी जाएगी। अगर आप उससे सहमत होंगे तो आपको एक सर्टिफिकेट दे दिया जाएगा और सोने को पिघला दिया जाएगा।

इसमें 25 रुपए प्रति आर्टिकल का चार्ज लगेगा और मुश्किल से आधे घंटे लगेंगे। उसके बाद उस सोने को या तो बैंक भेजेगा या फिर एमएमटीसी के पास जमा करा देगा। लेकिन ये प्योरिटी सेंटर का काम है, आपको इस पचड़े में नहीं पड़ना है।

प्योरिटी सेंटर की ओर से जो सर्टिफिकेट दिया जाएगा उस पर जिस बैंक का नाम लिखा होगा उस बैंक में सोना जमा कराएंगे। बैंक में जमा कराने के 30 दिन के भीतर या जैसे ही रिफाइनरी से सर्टिफिकेट आ जाएगा कि आपका गोल्ड जमा हो गया है आपको एक सर्टिफिकेट दे दिया जाएगा। उस दिन से आपको ब्याज मिलने लगेगा।

अगर आप 1 से 3 साल तक के लिए सोना जमा करते हैं तो सोने के बदले सोना मिलेगा। लेकिन वो सोना या ज्वैलरी नहीं मिलेगी जिसे आपने जमा कराया है बल्कि उसके बराबर का गोल्ड बार मिलेगा। अगर 5 से 7 साल या फिर 12 से 15 साल के लिए भी जमा कर सकते हैं।

इस पर जो ब्याज मिलेगा वो सोने के तौर पर मिलेगा। लेकिन नकद मिलेगा। यानी 1 किलो सोने पर अगर आपको कुल 10 फीसदी ब्याज मिलता है तो एक किलो 100 ग्राम सोना या सोने की कीमत के बराबर का पैसा मिलेगा। जिस दिन आप सोना निकालेंगे उस दिन की सोने की कीमत के आधार पर आपको भुगतान किया जाएगा।

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