9 मीटर गहरी चट्टान को खोखला करके बनाया गया है ‘धर्मराजेश्वर मंदिर’

8 वीं शताब्दी में बनाए गए मंदिर की खासियतहै,चट्टान को खोखला करके ठोस शिला को देवालय में बदला गया है।

source: patrika

मंदसौर। इस मंदिर की कलाकृति उत्तर भारत के मंदिरों के समान ही है। इसकी तुलना सुप्रसिद्ध एलोरा के कैलाश मंदिर से की जाती है। क्योंकि कैलाश मंदिर के समान ही ये एकाश्म शैली में बनाया गया है। 8 वीं शताब्दी में बनाए गए इस मंदिर की खासियत ये है कि चट्टान को खोखला करके ठोस प्रस्तर शिला को देवालय में बदला गया है। देश के आलौकिक मंदिरों में से एक धर्मराजेश्वर मंदिर मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले की शामगढ़ तहसील में स्थित है।

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1453 मीटर लंबा, 10 मीटर चौड़ा
अपनी सुन्दरता, विशालता और उत्कृष्टता के लिए धर्मराजेश्वर मन्दिर प्रसिद्ध है, जो 54 मीटर लम्बी, 20 मीटर चौड़ी और 9 मीटर गहरी चट्टान को तराशकर बनाया गया हैं। मन्दिर में द्वार-मण्डप, गर्भगृह और शिखर आदि निर्मित हैं। मध्य में एक बड़ा मन्दिर हैं, जिसकी लम्बाई 1453 मीटर तथा चौड़ाई 10 मीटर हैं, जिसका उन्नत शिखर आमलक तथा कलश से युक्त हैं। इस मन्दिर में महामण्डप की रचना उत्कीर्ण की गई है, जो पिरामिड के आकार में है। धर्मराजेश्वर मन्दिर की सुन्दर तक्षण कला अद्भुत है।
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निखर गर्ई जर्जर गुफाएं
धर्मराजेश्वर की गुफाओं का जीर्णोद्धार के बाद जर्जर हो चुकी गुफाएं निखर गई हैं। यहां पुरातत्व विभाग ने तीन साल में एक बगीचा बनाया है। जहां कभी कटिली झाडिय़ां उगी थी वहां अब सुगंधित रंग बिरंगे फूल बने हुए हैं। पूर्व में पर्यटन विभाग ने सभा भवन बनाया था। इसे पुरातत्व विभाग ने जिज्ञासा केंद्र बनाया है। इसके अंदर धर्मराजेश्वर से संबंधित सभी जानकारियों के फ्लेक्स लगाए हैं। यहां धर्मराजेश्वर की पांचवीं शताब्दी से अब तक की सारी जानकारियां संकलित है।

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इनका कहना है
जीर्णोद्धार का काम 3 साल से चल रहा है और अब तक 20 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। अभी कुछ फिनिशिंग बची है जो आने वाले दिनों में हो जाएगी। इस बात का खास ध्यान रखा गया है कि इसके मूल स्वरूप में कोई परिवर्तन न हो।
-मर्दनसिंह बनाफिर, स्थानीय प्रभारी पुरातत्व विभाग
इस केंद्र में आने के बाद पर्यटकों को और किसी से जानकारी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मंदिर को बेहतरीन बनाने का पूरा प्रयास किया गया है।
-पूजा सक्सेना, पर्यटन विभाग

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