महेश भट्ट को मनाने के लिए बिना कपड़ों के दौड़ पड़ी थी परवीन बॉबी, ऐसी थी इनकी अधूरी प्रेम कहानी

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महेश भट्ट को मनाने के लिए बिना कपड़ों के दौड़ पड़ी थी परवीन बॉबी, ऐसी थी इनकी अधूरी प्रेम कहानी
महेश भट्ट को मनाने के लिए बिना कपड़ों के दौड़ पड़ी थी परवीन बॉबी, ऐसी थी इनकी अधूरी प्रेम कहानी

महेश भट्ट को मनाने के लिए बिना कपड़ों के दौड़ पड़ी थी परवीन बॉबी, ऐसी थी इनकी अधूरी प्रेम कहानी : बॉलीवुड की कुछ बेहद चर्चित शख्सियतों में रहे हैं महेश भट्ट। जितना उन्होंने अपने काम से सुर्खियाँ बटोरी, उससे कहीं ज्यादा अपनी विवादास्पद जिंदगी के कारण। कभी बेटी पूजा भट्ट के साथ लिप-लॉक किस तो कभी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के कारण वो चर्चा में रहे हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं महेश भट्ट और परवीन बाबी की अधूरी प्रेम कहानी के बारे में। इन दोनों के बीच दीवानगी का ऐसा आलम था कि एकबार महेश भट्ट नाराज होकर जा रहे थे तो पीछे से परवीन बाबी दौड़ते हुए पहुँच गई। बाद में उन्हें ख्याल आया उन्होंने तो कपड़े ही नहीं पहने हैं।

महेश भट्ट को मनाने के लिए बिना कपड़ों के दौड़ पड़ी थी परवीन बॉबी, ऐसी थी इनकी अधूरी प्रेम कहानी
महेश भट्ट को मनाने के लिए बिना कपड़ों के दौड़ पड़ी थी परवीन बॉबी, ऐसी थी इनकी अधूरी प्रेम कहानी

साल था 1977। परवीन अपने एक्टिंग करियर में टॉप पर थीं, जब वो महेश भट्ट को दिल दे बैठी थीं। दोनों का इश्क परवान चढ़ रहा था। उस वक्त महेश भट्ट शादीशुदा थे, जबकि परवीन कबीर बेदी से ब्रेकअप के सदमे से उबर रही थीं। अपने जमाने की सुपरस्टार परवीन और महेश ने लिव-इन में रहना शुरू कर दिया। दोनों एक-दूसरे के इतने करीब आ गए थे कि इनके बीच सिर्फ प्यार के लिए ही जगह थी। जब दोनों साथ होते थे तो स्टारडम कहीं पीछे छूट जाता था। घर पर परवीन एक साधारण लड़की होती थीं, जो महेश को पागलों की तरह प्यार करती थीं। लेकिन धीरे-धीरे महेश भट्ट को एहसास हुआ और उन्होंने अपनी बीवी के पास वापस लौट जाने का फैसला किया।

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महेश भट्ट को मनाने के लिए बिना कपड़ों के दौड़ पड़ी थी परवीन बॉबी, ऐसी थी इनकी अधूरी प्रेम कहानी
महेश भट्ट को मनाने के लिए बिना कपड़ों के दौड़ पड़ी थी परवीन बॉबी, ऐसी थी इनकी अधूरी प्रेम कहानी

महेश भट्ट के इस व्यवहार से परवीन को गहरा आघात पहुँचा। वो मानसिक रूप से बीमार पड़ गई। दोनों अलग हो गए। दोनों की प्रेम कहानी का अंत हो गया। लेकिन ये कहानी अभी दुनिया को सुनाई जानी बाकी थी। महेश भट्ट ने एक स्क्रिप्ट लिखी और उस पर फिल्म बनाई। फिल्म का नाम था अर्थ। कहते हैं यह फिल्म महेश भट्ट की जिंदगी से ही प्रभावित थी। इस फिल्म में उन्होंने अपनी जिंदगी की सच्चाई को उकेरा।

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