पनीर सेल्वम ने ली तमिलनाडू के मुख्यमंत्री पद की शपथ

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नई दिल्ली (6 दिसंबर): तमिलनाडू के विधानमंडल दल के नेता चुने जाने के बाद पनीर सेल्वम को रात ही में लगभग 1बजकर 20 मिनट पर मुख्यमंत्री के पद की शपथ ग्रहण करवायी गयी। शपथ ग्रहण से पहले दो मिनट का मौन रखा गया।

2014 में आय से ज्यादा संपत्ति के मामले में जयललिता के जेल जाने के बाद भी पनीरसेल्वम को ही मुख्यमंत्री बनाया गया था। इस दौरान पनीरसेल्वम, जयललिता की कुर्सी तक पर कभी नहीं बैठे। जयललिता के जेल से बाहर आते ही बिना देरी किए पनीरसेल्वम ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया था।

2001 में आय से अधिक संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा फैसला सुनाया था। फैसले के मुताबिक जयललिता पर कोई भी पद लेने से रोक लग गई थी, जिसके बाद जयललिता ने अपनी जगह पनीरसेल्वम को मुख्यमंत्री के तौर पर आगे कर दिया। 21 सितंबर 2001 से 1 मार्च 2002 तक पनीरसेल्वम ने मुख्यमंत्री का पदभार संभाला। करीब 6 महीने तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज होने के बावजूद पनीरसेल्वम ने जयललिता के विश्वास को बनाए रखने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने जयललिता की जानकारी के बिना सरकार से जुड़ा कोई फैसला कभी नहीं लिया।

कहते हैं कि इस दौरान पनीरसेल्वम की तुलना भगवान राम के भाई भरत से भी होने लगी थी। अपने प्रति पनीरसेल्वम की ऐसी आस्था को देखने के बाद जयललिता का भरोसा बढ़ता गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट से ही जयललिता की सजा खारिज होने का बाद बिना किसी हिचक पनीरसेल्वम ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद जयललिया का प्रदेश के मुखिया बनने का रास्ता साफ हो गया।

दूसरा मौके 2014 में आया जब जयललिता को आय से ज्यादा संपत्ति मामले में जेल जाना पड़ा। पिछले अनुभव को देखते हुए इस बार भी पार्टी के कई बड़े नेताओं को दावेदारी को दरकिनार करते हुए जयललिता ने पनीरसेल्वम को अपना नुमाइंदा चुना। 29 सितंबर 2014 को दोबारा मुख्यमंत्री बने पनीरसेल्वम ने 22 मई 2015 तक पद संभाला। इस दौरान सीएम रहते वो कभी जयललिता की कुर्सी पर नहीं बैठे।

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