PM मोदी ने मुंबई तट पर अरब सागर में रखी शिवाजी स्मारक की आधारशिला

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नई दिल्ली: अपने एकदिवसीय दौरे पर मुंबई पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मुंबई तट पर स्थित अरब सागर के एक द्वीप पर छत्रपति शिवाजी स्मारक की आधारशिला रखी। सीएम देवेंद्र फडणवीस का दावा है कि ये स्मारक भारत का ही नहीं दुनिया का सबसे लंबा स्मारक होगा। करीब 15 एकड़ के द्वीप पर प्रस्तावित स्मारक समंदर के किनारे से डेढ किलोमीटर अंदर होगा।

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इस स्मारक में लगने वाले शिवाजी महाराज के पुतले की ऊंचाई घोड़े समेत 192 मीटर है। घोड़े पर बैठे हुए छत्रपती शिवाजी महाराज के पुतले की उंचाई 114.4 मीटर है। ये स्मारक करीब 13 हेक्टेयर के चट्टान पर बनाया जाएगा।

 

यहां एक समय में 10 हजार लोग एक साथ आ सकते हैं। इस स्मारक पर एक एम्पीथिएटर, मंदिर, फूड कोर्ट, लाइब्रेरी, ऑडियो गायडेड टूर, थ्री डी-फोर डी फिल्म, एक्वेरियम जैसी सुविधाए होंगी। परियोजना की कुल लागत 3600 करोड़ रुपए है, जिसमें से पहले चरण की लागत 2500 करोड़ रुपए होगी।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने रायगढ़ जिले में एमआईडीसी पटलगंगा में राष्ट्रीय सुरक्षा प्रबंधन संस्थान के नवनिर्मित परिसर का उद्घाटन किया वहां देश के आर्थिक हालात पर बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिरावट का समय है, विश्व में सर्वोच्च वृद्धि के अनुमान के साथ भारत को एक प्रकाशपुंज की तरह देखा जा रहा है।’

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उन्होंने कहा तीन वर्षों से भी कम समय में सरकार ने अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने का काम किया है, राजकोषीय घाटे को कम किया है और विदेशी मुद्रा का भंडार बढ़ा है, साथ ही मुद्रास्फीति कम हुई है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने और सुधारों को आगे बढ़ाने का संकेत देते हुये आज कहा कि उनकी सरकार राष्ट्रहित में कठिन फैसले लेने से नहीं हिचकिचायेगी, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नोटबंदी कुछ समय की परेशानी है।

मोदी ने कहा, ‘उनकी सरकार और दीर्घकालिक नीतियों को लायेगी जो कि टिकाउ और मजबूत होंगी।’ इससे उच्च आर्थिक वृद्धि दर को बनाये रखने में मदद मिलेगी। मोदी ने आज यहां पूंजी बाजार नियामक सेबी के नये शैक्षणिक और प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन किया। यह संस्थान सेबी के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ सिक्योरिटीज मार्केट्स (एनआईएसएम) के तहत काम करेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘उनकी सरकार सोची समझी और मजबूत आर्थिक नीतियों पर चलती रहेगी और कोई भी फैसला अल्पकालिक राजनीतिक फायदे के लिये नहीं करेगी।’

मोदी ने स्वीकार किया कि नोटबंदी की वजह से जनता को कुछ समय के लिये परेशानी हुई है, पर उन्होंने कहा कि ‘इससे लंबे समय में फायदा होगा।’’

उन्होंने साफ किया कि सरकार ठोस और कारगर आर्थिक नीतियों को आगे बढ़ाना जारी रखेगी और अल्पकालिक राजनीतिक फायदे के लिए कोई निर्णय नहीं करेगी।

जीएसटी के बारे में बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बहुप्रतिक्षित जीएसटी जल्द ही वास्तविकता बनेगी और आज प्रत्यक्ष विदेशी निवेश रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया है। स्टॉक मार्केट पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि स्टॉक मार्केट को सार्थक उद्देश्यों के लिए पूंजी जुटाना चाहिए, बांड मार्केट को दीर्घकालिक आधारभूत ढांचे के वित्तपोषण का माध्यम बनना चाहिए।

मोदी ने इस साल बड़ी संख्या में आईपीओ बाजार में उतरने पर सेबी की सराहना की, पूंजी बाजार नियामक से पूंजी और कृषि बाजार को ई-नाम प्लेटफार्म के जरिये जोड़ने को कहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि बजट पहले पेश करने से उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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मोदी ने वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के मुद्दे पर कहा कि देश का यह सबसे बड़ा कर सुधार जल्द ही वास्तविकता बनेगा। जीएसटी को लेकर हालांकि, अभी तक केन्द्र और राज्यों के बीच सभी मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। जीएसटी के तहत करदाताओं पर अधिकार और दोहरे नियंत्रण के मुद्दे पर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सत्ता संभालने के पिछले 30 माह के दौरान उन्होंने अर्थव्यवस्था में काफी बदलाव किया है। उन्होंने जब सत्ता संभाली तब अर्थव्यवस्था काफी खराब स्थिति में थी। चालू खाते का घाटा और राजकोषीय घाटा काफी उंचा था। मुद्रास्फीति दहाई अंक के करीब थी और विदेशी मुद्रा भंडार भी कम था।

मोदी ने कहा कि कई तरह की परेशानियों के बावजूद उनकी सरकार ने इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काफी सुधार किया है। आज भारत सुस्ती से जूझ रही दुनिया में एक आकषर्क चमकता स्थान है। ‘पूरी दुनिया आर्थिक सुस्ती से जूझ रही है जबकि भारत को एक आकषर्क चमकती अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में उसकी वृद्धि सर्वाधिक रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है।’

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प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि बजट को तय समय से पहले पेश किये जाने और अर्थव्यवस्था के सभी उत्पादक क्षेत्रों को उपयुक्त संसाधन उपलब्ध कराने से उत्पादकता में सुधार आयेगा।

मोदी ने पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की भी सराहना की। इस साल बड़ी संख्या में प्रारम्भिक सार्वजनिक निर्गम :आईपीओ: बाजार में आये और पूंजी बाजार का विकास हुआ। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिये वित्तीय बाजार काफी महत्वपूर्ण होते हैं।

मोदी ने कंपनियों के बांड के लिये एक मजबूत बांड बाजार की आवश्यकता को रेखांकित किया। ताकि कंपनियां बांड के जरिये संसाधन जुटा सकें और बैंकों का धन दूसरे कम संगठित क्षेत्रों के विकास में काम आ सके। प्रधानमंत्री ने बाजार नियामक सेबी और वित्त मंत्रालय से कहा कि वह स्थानीय निकायों को भी पूंजी बाजार से धन जुटाने में मदद करें। शेयर बाजारों को उत्पादक कार्यों के लिये धन जुटाने में मदद करनी चाहिये और जबकि बांड बाजार दीर्घकालिक ढांचागत परियोजनाओं के लिये वित्त जुटाने का स्रोत बन सकता है।

इस कार्यक्रम में वित्त मंत्री अरुण जेटली, महाराष्ट्र के राज्यपाल विद्यासागर राव, मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस, सेबी चेयरमैन यू.के. सिन्हा तथा कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ साथ वरिष्ठ बैंकर भी उपस्थित थे

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